wakt shayari

वक़्त से लड़ कर जो नसीब बदल दे,
इंसान वो ही जो अपनी तकदीर बदल दे,
कल क्या होगा किसे पता,
क्या पता कल वक़्त खुद अपनी लकीर बदल दे. 

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